वीरेन्द्र सहवाग की जीवनी । Virendra Sehwag Biography in Hindi

वीरेन्द्र सहवाग भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास के महान खिलाड़ियों में से एक हैं। वे भारतीय टीम के विध्वंसक क्रिकेटरो में से एक माने जाते है सहवाग एक right hand bastman थे जो बहुत aggressive बल्लेबाजी करते थे।  इनकी team में भूमिका सलामी बल्लेबाज की थी इन्होने अपने बैखोफ और आक्रामक बल्लेबाजी के अंदाज से खास कर टेस्ट क्रिकेट में opening के मायने ही बदल कर रख दिये। सहवाग बड़ी आतिशी बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बटोरते थे। उनकी इसी attacking शैली के कारण उन्हें क्रिकेट प्रेमियों द्वारा बेहद लोकप्रियता प्राप्त हुई वर्तमान समय में भी में उनके अनेक अनुयायी हैं जो उन्हें आज भी उन्हें सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज मानते है। सहवाग जब अपनी लय में होते हैं तो किसी भी देश के गेंदबाजों के bowling attack को ध्वस्त करने की क्षमता रखते थे। यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगी की वे तत्कालीन समय के सबसे बिस्फोटक बल्लेबाज थे। इस बात का समर्थन सर विवियन रिचर्डसन भी करते है। एक सफल बल्लेबाज होने के साथ वे एक part time  right arm off break bowler भी थे इन्होने कई बार टीम के लिए अपनी bowlling की उपयोगिता को भी दर्शाया हैं। सहवाग अब इंडियन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम का हिस्सा नहीं है, उन्होने अपने 37 वे जन्मदिन के दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी formets से तथा ipl से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी। परन्तु वे ipl में kings eleven punjab की टीम के प्रमुख सलाहकार रहते हुए अभी भी क्रिकेट जगत से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही वे Fila sports compny के brand ambassador तथा बहुत सी कम्पनी के sponsors भी है। सहवाग अपने चाहने वाले समर्थकों और साथी खिलाड़ियों में “वीरु” नाम से भी जाने जाते हैं साथ ही वे अपने उपनामो जैसे nawab off najafgarh, multan ka sultan, zen masters off modern cricket आदि से भी मशहूर है।

वीरू का जन्म 20 October 1978 को हरियाणा के एक संयुक्त जाट परिवार में हुया। संयुक्त परिवार होने के कारण इनका परिवार काफ़ी बड़ा था चाचा- चाची, ताऊ – ताई के बेटो को मिलाकर सहवाग के 16 भाई थे जिनके साथ उनका बचपन गुजरा इनके पिता किशन सहवाग एक grain merchant थे, जिससे उनकी अच्छी आय थी। इनकी माता कृष्णा सहवाग एक गृहणी है। सहवाग का परिवार हरियाणा से दिल्ली आ गए थे और नजफगढ़ इलाके मे निवास करने लगे इन्होने अपनी प्रारंभिक शिक्षा arora vidhya school delhi से ही की तथा jamiya miliya ismiliya collage new Delhi से graduation degree प्राप्त की। सहवाग ने 2004 को आरती अहलावत से विवाह किया , इनके दो बेटे भी हैं। सहवाग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले से ही सचिन तेंदुलकर के प्रशंसक रहे है और आगे चलकर उनके साथ वीरू को क्रिकेट खेलने का मौका मिला दोनो ने मिलकर टीम के लिए कई बार पारी की शुरुआत की इन दोनो की सलामी जोड़ी बहुत सफल रही। सचिन, सहवाग के काफी सहायक भी रहे हैं। अपने करियर के प्रारंभ में सहवाग शॉट्स खेलने के लिए जिस तरह से अपने arms का प्रयोग करते थे वह क्रिकेट के नियम अनुसार गलत माना जाता है, बाद में उन्होंने ने इस विषय पर सुधार किया।

सहवाग के कोच amar nath sharma थे, जिनसे इन्होने क्रिकेट का प्रशिक्षण लिया । वीरु के जीवन मे एक बार रोचक घटना हुई सन् 1990 में क्रिकेट खेलते समय जब सहवाग को चोट लगने से उनका एक दांत टूट गया तो उनके पिता ने उनके क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया परन्तु उनकी मां के हस्तक्षेप से आखिरकार उन्हें खेलने की इजाजत मिली।

Career:

सहवाग ने अपने first class क्रिकेट की शुरुआत 1997-98 मे दिल्ली की टीम से की थी। सहवाग indian u-19 टीम का भी हिस्सा रहे।

प्रत्येक खिलाड़ी की यह अभिलाषा होती हैं कि उसे अंतरराष्ट्रीय टीम में स्थान मिले और अपने देश के लिए खेलने का गौरव प्राप्त हो, सहवाग की यह कामना तब पूरी हुई जब उन्हें 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ अपने करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय odi मैच खेलने का मौका मिला अपने debut match में वीरु का प्रदर्शन निराशाजनक रहा वह महज 1 रन ही बना सके और पाकिस्तानी गेंदबाज शोएब अख्तर द्वारा lbw होकर पवेलियन लौट गए साथ ही उनकी गेंदबाजी भी कोई छाप नही छोड़ पाई सहवाग को इसके पश्चात टीम में अपनी वापसी के लिए 20 माह का इन्तजार करना पड़ा 2001 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई श्रृंखला में दोबारा इन्हें खेलने का मौका मिला उन्होंने इस श्रृंखला में बेहतरीन प्रदर्शन किया।इसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और क्रिकेट जगत में अपने नाम का डंका बजा दिया हालांकि उनका करियर में काफ़ी उतार-चढ़ाव रहे एक हद तक तो उनके टीम में स्थान को लेकर भी सवाल उठ खड़े हुए परन्तु फिर भी  उन्होंने अलोचनायो को अनसुना किया और अपनी प्रतिभा से आलोचकों को करारा जवाब दिया , वैसे तो वीरु की आक्रामक बल्लेबाजी क्रिकेट के छोटे formats के अनुकूल है , परन्तु सहवाग टेस्ट क्रिकेट में अधिक सफल रहे, उन्होंने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत 2001 मे साउथ अफ्रीका के खिलाफ की थी,यदि टेस्ट क्रिकेट के आकड़े देखे तो उनके आदर्श सचिन भी उनसे पीछे रह जाते है। सहवाग ने अपने टेस्ट करियर में दो तिहाई शतक लगाए हैं। तथा एक बार 293 रन बनाकर आउट हुए और तीन तिहरे शतक लगाने के कीर्तिमान स्थापित करने से चूक गए। उन्होंने 2004 में Pakistan के विरुद्ध मुल्तान में 309 रनो की पारी खेली थी, जिसके कारण उन्हें मुल्तान के सुल्तान कहा जाता हैं। सहवाग का t20 करियर भी बेहतर रहा है घरेलू t20 ipl मे सहवाग ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का दूसरा कोई सानी नहीं हैं।

Record’s –

सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में दो शानदार शतक लगाए वह ऐसा करने वाले प्रथम भारतीय व विश्व के तीसरे खिलाड़ी बने, वे विश्व के प्रथम खिलाड़ी हैं जिन्होंने six लगाकर अपना तिहरा शतक पूरा किया था। वीरु के नाम सबसे तेज तिहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड है उन्होंने महज 278 बालो मे अपना तिहरा शतक जड़ा उन्होंने 2009 श्रीलंका के खिलाफ एक दिन के खेल में 284 रन बनाए जो 1933 के बाद टेस्ट मैच में एक दिन में बनाए गए सर्वाधिक रन थे। इसके साथ ही उन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर टेस्ट मैच में 410 रनो की partnership की थी। अपने टेस्ट करियर की 11 शतकीय पारियों में 150+स्कोर किया।

एक समय उनके नाम क्रिकेट के तीनों formats मे एक innings मे बनाए गए सर्वाधिक रनो का रिकॉर्ड था इन्होने odi मेच मे 219 रनो की पारी खेली थी तथा सचिन द्वारा बनाए गए 200 रनो का रिकॉर्ड तोड़ते हुए वह दोहरा शतक लगाने वाले विश्व के दूसरे बल्लेबाज बने।

सहवाग ने घरेलू t20 ipl में लगातार 5 consecutive अर्द्धशतक लगाए हैं।

Awards-

सहवाग को 2002 मे अर्जुन अवार्ड मिला था, वे 2008 तथा 2009 मे लगातार दो बार wesdon leading cricketer in the world award दिया गया है यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे एकमात्र भारतीय है , तथा 2010 में पदमश्री अवार्ड के द्वारा भी वीरु की प्रतिभा को नवाजा गया है , 2010 में उन्हें icc best test player off the year का अवार्ड मिला था

2011 में ESPN crick-info award द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर पुरस्कार दिया गया

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