Inspirational story of Swami Vivekananda – स्वामी विवेकानंद के प्रेरक विचार

जन्म – 12 जनवरी 1863 
स्थान – कलकत्ता 
अमेरिका में भाषण – 1893 
समाधि – 4 जुलाई 1902 

ब्रम्ह्मण्ड की सारी शक्तियां पहले से हम में है 
 वह हम ही है जो आँखों पर हाथ रख लेते है,
और फिर रोते है की कितना अंधकार है
Story-1 Power of Concentration एकाग्रता की शक्ति  .
जब स्वामी विवेकानंद अमेरिका के दौरे पर थे तब वह कहीं घूमने निकले और एक पुल पर पहुँचे वहां पर कुछ लड़के पुल पर से नीचे नदी में तैर रहे अण्डे के छिलकों पर बंदूक से निशाना लगा रहे थे। पर उनका एक भी शॉट निशाने पर नहीं लग रहा था यह देख स्वामी विवेकानंद जी ने उनसे बंदूक ली और लगातार नदी में तैर रहे अंडो पर निशाना लगाया यह देख वो लड़के आश्चर्चकित रह गए और उन्होंने स्वामी जी से पूछा –
आपने एक साधु होते हुए भी इन अंडे के छिलकों पर लगातार बिना चूके निशाना लगा दिए तब स्वामी विवेकानंद ने बड़ी ही सरलता से कहा –

जो कुछ भी आप करते है आपका पूरा ध्यान उसी पर रहना चाहिए  जैसे आप बंदूक से अंडो पर निशाना लगा रहे है तो आपका पूरा ध्यान सिर्फ अंडो पर ही रहना चाहिए और कहीं नही आप कोई भी काम एकाग्रता के साथ करेंगे तो निश्चित ही सफल होंगे।

Story-2 

एक दिन स्वामी विवेकानंद अमेरिका में एक रेलगाड़ी में यात्रा कर रहे थे। जिस डिब्बे में विवेकानंद यात्रा कर रहे थे। उसी डिब्बे में तीन लडकिया भी यात्रा कर रही थी वे सोच रही थी कि स्वामी जी की इंग्लिश नही आती इसलिए वो लडकिया स्वामी के पहनावें को देखकर उनका मजाक उड़ा रही थी और उनको परेशान करने की कोशिश कर रही थी उन लड़कियों ने देखा कि स्वामी जी एक मंहगी घड़ी पहनें हुए है, उन्होंने विवेकानंद जी से  कहा वो वह घड़ी उनको देंदे वरना वो पुलिस बुलाएगी और कहेंगी कि ये स्वामी उनको परेशान कर रहे है परन्तु स्वामी जी ने कोई जवाब नही दिया और हाथ हिला के संकेत दिया की वो सुन नही सकते आप जो कुछ कहना चाहते है इस कागज पर लिखकर मुझे दे दो में पढ़ लूँगा उन लड़कियों ने स्वामी जी को लिखकर दे दिया।

फिर क्या था स्वामी जी ने कहा अब तुम पुलिस बुलाओ में तुम्हारी शिकायत करूँगा कि ये लड़किया मुझे परेशान कर रही है यह सुनकर वो लडकिया स्वामी जी से माफ़ी मांगने लगी कहा की अब वो किसी को परेशान नही करेंगी फिर स्वामी जी ने उन्हें माँफ कर दिया।  



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