नामुनकिन! ये क्या होता है? Wilma rudolph motivational story in hindi

अगर किसी काम को करते समय हमारे जीवन में थोड़ी सी भी समस्या(Problem) आती है तो हार मान लेते और वह काम छोड़ देते है मगर  यह भूल जाते है की अगर उस काम को करने में कोई समस्या आ रही है उस समस्या का समाधान भी जरूर होगा क्योंकि –

 

                     जिस तरह हर ताले की एक चाबी होती है, और उसे उस चाबी से खोला जा सकता है
          ठीक उसी तरह अगर हमारे जीवन कोई समस्या आती है, तो उस समस्या का समाधान जरूर होता है
Wilma rudolph motivational story in hindi

 

यह कहानी एक ऐसी लड़की की विल्मा रुडोल्फ ही जो अपने जन्म के समय से ही विकलांग थी पर उसने हार नहीं मानी और अपने जीवन को मिशाल बना दिया और आज भी लोग उसका नाम बड़े गर्व से लेते है
ये बात सन 1939 की है जब एक लड़की ने गरीब परिवार में जन्म लिया तब इनके माता पिता को बहुत ख़ुशी मिली पर, इनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब थी इस लड़की की माँ लोगो के घरो में झाड़ू पोछे का काम करती थी और इनकी पिता कुली का काम करते थे जैसे-तैसे इनका जीवन चल रहा था 
समय अपनी गति से गुजरता जा रहा गया  और वह लड़की तीन साल की हुई तब उसके  माता-पिता को पता चला की उनकी बेटी पोलियो ग्रस्त है तब वह अपनी लड़की को डॉक्टर के पास दिखाने के लिए गए पर डॉक्टर ने जो जवाब दिया उसे सुनकर मानो उनके ऊपर बिजली सी गिर गई डॉक्टर ने उनसे कहा आपकी लड़की पोलियो ग्रस्त है इसके चलते वह कभी अपने पैरो के चलना तो दूर खड़ी भी नहीं हो सकती उसे अब ब्रेस के चलना पड़ेगा
कुछ समय बाद वह लड़की स्कूल पढ़ने के लिए जाने लगी एक दिन उसने कुछ बच्चो को स्कूल में दौड़ हिस्सा लेते देखा तो उसके में उस दौड़ में हिस्सा लेने का ख्याल आया पर वह यह सोचकर उदास हो गई कि वह अपने पैरो पर बिना ब्रेस के चल नहीं सकती
जब वह शाम को स्कूल से घर गई तो उसकी माँ को वह बहुत उदास दिखी तो इन्होने उसके उदास होने  का कारण पूछा तो उस लड़की ने उत्तर दिया आज मैंने स्कूल में अपने क्लास के बच्चो को स्कूल में दौड़ते हुए देखा तो मेरा भी मन दौड़ने को हुआ लेकिन में दौड़ नहीं सकती क्या मैं कभी भी नहीं दौड़ पाऊँगी
चूँकि उस बच्ची की माँ एक सकरात्मक सोच रखने वाली महिला थी उन्होंने अपनी बेटी को उत्तर दिया इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है अपनी इच्क्षा शक्ति और कड़ी मेहनत से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है वह जानती थी की अगर सोच पक्की और सकारात्मक  हो तो कोई भी चीज हासिल की जा सकती
यह बाते विल्मा रुडोल्फ के मन को छू गई और उसने उसी समय एक तेज धाविका बनने का लक्ष्य बना लिया और उसी समय अपने पैरो से ब्रेस उतारकर फेंक दिया धीरे-धीरे चलना शुरू किया चलते समय वह कई बार गिरी, लेकिन उसने हार नहीं मानी क्योंकि जब भी वह उदास होती तो अपने माँ के सकारात्मक शव्द को याद करके फिर खड़ी हो जाती और उसकी यह मेहनत रंग लायी
दो साल की कड़ी मेहनत के बाद विल्मा रुडोल्फ बिना किसी सहारे चलने में सफल हो गई फिर उसने दौड़ना शुरू किया और 13 की उम्र में वो दिन आया जिसके लिए उसने यह दौड़ शुरू की थी उसने अपने स्कूल की दौड़ में हिस्सा लिया सभी लड़किया तेजी से दौड़कर उससे आगे निकल गई और वह उस दौड़ में हार गई
मगर इससे उसका विश्वास कम के वजाय और बढ़ गया क्योंकि वह जानती थी, इच्क्षा शक्ति और कड़ी मेहनत से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है उसने आगे भी कई दौड़ में हिस्सा लिया परन्तु फिर भी वह दौड़ में आखरी नंबर पर आती पर उसने हार नहीं मानी
आख़िरकार वह दिन आ ही गया जिसका उसे बरसो से इंतजार था उसने अपने स्कूल की दौड़ में हिस्सा लिया और वह उस दौड़ में पहले नंबर पर आयी उस दिन उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था और होता भी कैसे यह उसकी पहली सफलता जो थी
जब वह 15 साल की हुई तो उसका Admission State University में हो गया जहा पर उसके कोच नाम एड टेम्पल था उसने अपने कोच से यह नहीं कहा की मैं दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना हूँ बल्कि उसने कहा मुझे दुनिया की सबसे तेज धाविका बनाना ही है कोच यह सुनकर बहुत ही खुश हुआ और उसने उसे ट्रैंनिंग देने का फैसला किया उस लड़की में बहुत कड़ी मेहनत की और बहुत सी दौड़ जीती
आख़िरकार वह दिन आ गया जिस दिन का हर खिलाडी(Athlete) को इंतजार रहता है वह Olympic में दौड़ने के लिए गई, लेकिन यह मुकाबला आसान नहीं था क्योंकि इस में दुनिया भर की सबसे बेहतर धाविकाओ ने हिस्सा लिया था
और उसका सामना एक ऐसी धाविका से था जिसे किसी भी दौड़ में कोई भी नहीं हरा सका था  जिसका नाम था जुक्का हेन ये क्या होता है
Olympic की पहली दौड़ 100 मीटर की थी जिसमे उसने जुत्था हेन को बड़ी ही आसानी से हरा दिया
और दूसरी दौड़ 200 मीटर की थी जिसमे उसने जुत्था हेन को फिर से हरा दिया
लेकिन इसके बाद रिले दौड़ थी जो की आसान नहीं होती इसमें सबसे तेज दौड़ने वाला सबसे पीछे दौड़ता है और उनको अपने बैटन बदलने होते है दौड़ शुरू हुई और शुरू की तीनो धाविका ने अपने बैटन बदल लिया, मगर विल्मा के हाथ से बैटन छूट गया और उसने पीछे देखा तो जुत्था हेन बड़ी ही तेजी से दौड़ते हुए आ रही थी उसमे अपना बैटन उठाया और विजली  तेजी से दौड़ना शुरू किया और जुत्था हेन को पीछे छोड़कर रेस को अपने नाम कर ली

और इतिहास के पन्नो में अपना नाम अमर करा लिया की दुनिया की पोलियो ग्रस्त लड़की 3 Gold Medal जीतकर दुनिया की सबसे तेज धाविका बन गई

विल्मा रुडोल्फ  Wilma Rudolph ने यह साबित कर दिया की आप अपनी इच्क्षा शक्ति और कड़ी मेहनत से दुनिया की कोई भी चीज को हासिल किया जा सकता है फिर चाहे उसे पाने का रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो

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